SIP में निवेश की कौन-सी तारीख देती है सबसे ज्यादा फायदा? 30 साल की रिसर्च में सामने आई बड़ी सच्चाई

मुंबई: म्यूचुअल फंड में एसआईपी के जरिए निवेश करने वाले करोड़ों निवेशकों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि आखिर महीने की कौन-सी तारीख निवेश के लिए सबसे बेहतर होती है। कई लोग महीने की शुरुआत में निवेश को सही मानते हैं, तो कुछ का मानना है कि महीने के आखिर में बाजार में गिरावट का फायदा उठाकर ज्यादा बेहतर रिटर्न पाया जा सकता है। अब इस लंबे समय से चल रही बहस पर 30 साल के आंकड़ों ने बड़ा खुलासा कर दिया है।

व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड की एक ताजा रिसर्च में वर्ष 1993 से अब तक के सेंसेक्स आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इस अध्ययन का मकसद यह समझना था कि महीने की अलग-अलग तारीखों पर की गई एसआईपी का लॉन्ग टर्म रिटर्न पर कितना असर पड़ता है।

30 साल के डेटा ने तोड़ा बड़ा भ्रम

रिसर्च में 10 साल के रोलिंग रिटर्न के आधार पर अलग-अलग तारीखों पर की गई एसआईपी के औसत रिटर्न की तुलना की गई। नतीजों में सामने आया कि महीने की शुरुआत, बीच या अंत में निवेश करने पर रिटर्न में लगभग कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ता।

आंकड़ों के मुताबिक, यदि निवेशक ने महीने की 1 से 5 तारीख के बीच एसआईपी की, तो औसत रिटर्न करीब 15.22 प्रतिशत रहा। वहीं 12 से 15 तारीख के बीच निवेश करने वालों को लगभग 15.26 प्रतिशत रिटर्न मिला। दूसरी तरफ 25 से 28 तारीख के बीच एसआईपी करने वालों का औसत रिटर्न करीब 15.24 प्रतिशत रहा।

यानि अलग-अलग तारीखों के बीच रिटर्न का अंतर सिर्फ 0.02 से 0.04 प्रतिशत तक सीमित रहा, जो लंबे समय के निवेश में लगभग नगण्य माना जाता है।

तारीख नहीं, निवेश की अवधि सबसे अहम

विशेषज्ञों का कहना है कि एसआईपी में सफलता का असली मंत्र सही तारीख नहीं, बल्कि लंबे समय तक लगातार निवेश बनाए रखना है। दरअसल, म्यूचुअल फंड में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग का सिद्धांत काम करता है, जिसके कारण बाजार के उतार-चढ़ाव समय के साथ संतुलित हो जाते हैं।

जब निवेशक 10, 15 या 20 साल जैसी लंबी अवधि तक नियमित निवेश जारी रखते हैं, तो बाजार की गिरावट और तेजी दोनों का असर औसत हो जाता है। यही वजह है कि बाजार को टाइम करने की कोशिश ज्यादातर मामलों में बेअसर साबित होती है।

कौन-सी तारीख चुनना रहेगा सबसे बेहतर?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एसआईपी के लिए वही तारीख सबसे अच्छी होती है जो आपकी आय और खर्च के पैटर्न के अनुकूल हो। नौकरीपेशा लोगों के लिए सैलरी आने के 3 से 5 दिन के भीतर की तारीख सबसे उपयुक्त मानी जाती है, ताकि पैसा अन्य खर्चों में जाने से पहले निवेश हो जाए।

वहीं कारोबार करने वाले निवेशक अपने कैश फ्लो के हिसाब से ऐसी तारीख चुन सकते हैं, जब खाते में पर्याप्त बैलेंस उपलब्ध रहता हो।

विशेषज्ञों का मानना है कि एसआईपी में सबसे जरूरी चीज अनुशासन, नियमित निवेश और लंबी अवधि तक धैर्य बनाए रखना है। यही रणनीति समय के साथ मजबूत संपत्ति बनाने में सबसे ज्यादा मदद करती है।

 

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